आज क्रमिक विकास की धारणा ने सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित कर दिया है। यह विषय विश्व के सभी विद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ाया जाता है और हर क्षण संसार के हजारों विद्यार्थियों को प्रभावित कर रहा है। इस धारणा के अनुसार जीवन निर्जीव ब्रह्माण्डीय धूल कणों (अणुओं व परमाणुओं) के क्रमिक विकास से उत्पन्न रचना है, जिसका कोई अर्थ व उद्देश्य नहीं है यद्यपि विश्व की सभी धार्मिक मान्यताएँ जीवन के दिव्य अर्थ व उच्च उद्देश्यों का दावा करती हैं। वेदान्त भी, जो भारतीय आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत का श्रेष्ठ दार्शनिक साहित्य है, जीवन और उसकी उत्पत्ति तथा अर्थ का सजीव वर्णन करता है। लेखक टी.डी. सिंह ने वेदान्त साहित्य में अंतर्दृष्टि डालकर जीवन के आध्यात्मिक आयाम व चेतना के क्रमिक विकास को सम्मिलित करते हुए जीवन का वृहत् अधिष्ठान प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह वेदान्तिक अधिष्ठान जीवन की गहराईयों को विचारने में सक्षम है। डॉ. सिंह अद्वितीय वैज्ञानिक व अध्यात्मवेत्ता हैं जिन्होंने विज्ञान व धर्म के अंतर्विषयक दृष्टिकोण द्वारा जीवन व सत्यता को समझने के प्रयास में कई पुस्तकें लिखी व उनका संकलन किया।
डॉ. टी.डी. सिंह (श्री श्रीमद् भक्तिस्वरूप दामोदर स्वामी) एक वैज्ञानिक हैं और अध्यात्मवेत्ता भी। उन्होंने पीएच.डी. की उपाधि भौतिक कार्बनिक रसायन विज्ञान में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इर्विन, यू.एस.ए. से प्राप्त की और भारत की भक्तिवेदान्त परम्परा में अध्यात्म का अध्ययन किया। डॉ. सिंह भक्तिवेदांत संस्थान के अन्तर्राष्ट्रीय निदेशक एवं विज्ञान व धर्म के संवाद को आगे बढ़ाने वालों में अग्रगण्य रहे हैं।
Título : जीवन और आध्यात्मिक विकास
EAN : 9788189635770
Editorial : Bhaktivedanta Institute, Kolkata
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