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स्वर्गविभा त्रैमासिक हिंदी पत्रिका
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स्वर्गविभा वेबसाईट पत्रिका पिछले अठारह सालों से, हिंदी जगत के सम्मुख, विनयावत भाव से समुपस्थित है| पत्रिका के दिसंबर 2022 के लिए संदेश देते हुए, मुझे अत्यंत प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है| हमेशा की तरह पत्रिका का यह अंक भी विश्व के विभिन्न देशों के हिंदी प्रेमियों, प्राध्यापकों, अनुसन्धानकर्त्ताओं एवं विद्वानों को अपने विभिन्न सोच के जरिये उनका मार्ग प्रशस्त करेगी| देश-विदेश के साहित्यकारों, ग़ज़लकारों और रचनाकारों की रचनाओं को, एक जगह एकत्रित कर, उन्हें अंतिम रूप देकर, पत्रिका में बाँधकर प्रकाशित करना, बड़ा कठिन और महत्वपूर्ण कार्य है, जिसे स्वर्गविभा पत्रिका करती आ रही है|
विगत दो साल कोरोना महामारी के कारण, यह कार्य अपेक्षाकृत बड़ा चुनौतीपूर्ण रहा, बावजूद यह पत्रिका, निर्विघ्न आप तक पहुँचती रही| कारण, स्वर्गविभा की यह कोशिश रही है कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्रसंघ की सातवीं आधिकारिक भाषा का दर्जा मिले| यह तभी संभव है, जब सभी हिंदी भाषा, भाषाई अनवरत चेष्टा करते रहें| कभी रुकें नहीं, क्योंकि रुकना, ही थक जाना होता है, और, एक थका आदमी, अपनी भलाई की बात नहीं सोच सकता| वह हिंदी की बात कैसे सोच सकता है, जिससे कि हिंदी को गति और प्रवाह मिलती रहे, हिंदी जगत और शेष विश्व के बीच एक सेतु का काम करती रहे|
मैं इस पत्रिका के प्रकाशन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान करने वालों का आभार प्रकट करता हूँ, और आगे भी इस सहयोग की आशा रखता हूँ| नए साल की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ|
Título : स्वर्गविभा ऑनलाइन त्रैमासिक हिंदी पत्रिका दिसंबर २०२२
EAN : 9788195609543
Editorial : डॉ .तारा सिंह
El libro electrónico स्वर्गविभा ऑनलाइन त्रैमासिक हिंदी पत्रिका दिसंबर २०२२ está en formato ePub
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